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माॅं की ममता

विधा : पद्य

माॅं की ममता ,
माॅं की क्षमता ,
दुनिया में कहाॅं ,
माॅं संग समता ।
माॅं ही शुभ दिन ,
माॅं बिन दुर्दिन ,
माॅं ही है समय ,
समय न माॅं बिन ।
माॅं बिन न काया ,
माॅं बिन न छाया ,
माॅं बिन मानव ,
कहाॅं से है आया ।
माॅं की है ममता ,
बेटे की है नम्रता ,
माॅं से पूत सपूत ,
माॅं से ही कर्मता ।
माॅं ही राग सुर है ,
माॅं बिन बेसुर है ,
माॅं बिन जैसे ,
दुनिया भी दूर है ।
माॅं है तो नूर है ,
माॅं ही कोहिनूर है ,
ऑंखें दी ईश्वर ने ,
माॅं बिन सब सूर है ।


अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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