
मन में हो चाहत उनके प्रति,
लेवे हिलोरे प्यार की भावना।
ईश्वर की होती यूं आराधना है,
यह प्रेम एक सच्ची साधना है।।
यह मीरा की वो अनन्य भक्ति है,
राधा की आँखों में झलकती कश्ती है।
यह सुर की वात्सल्य भक्ति है,
कबीर की ज्ञान वैराग्य नीति है।।
महादेवी के मधुर गीत है,
अमृता की सच्ची प्रीत है।
निराला की सौम्य प्रकृति है,
यह दिनकर की राष्ट्रभक्ति है।।
आज प्रेम की परिभाषा बदल रही है,
देखो आलिंगन की चाहत बढ रही है।
भूलकर अपने उस आत्म तत्व को,
बस निज देह की प्यास बुझा रहे है।।
काया से केवल चाहत बढती,
आत्मा से नित प्रेमरस बहता है।
कुछ पाने की लालसा यूं त्यागकर,
सब कुछ देने की कामना रहती है।।
मुन्ना राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












