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कुदरत

शायर करता है तारीफ हुस्न की… माशूक ने कर दी तारीफ माशूका की… न आने कितनों ने की तारीफ किसी ना किसी की।

घर तारीफ लायक तो कुदरत है… रंग बिरंगी रंगों से सजी इनायत है।

हवा ने पत्तों को कुछ ऐसे हिलाया है… जैसे हर तरफ चूड़ियों की खनखनाहट को सुनाया है।

सुनहरे रंग के साथ ऐसे सूरज निकला है… सोने जैसे धरती नजर आ रही हर तरफ है।

चांद साथ खूबसूरती बिखेरती चांदनी को लाया है… कितनी बातों को उसने जगमगाते तारों से बुलवाया है।

नदियों का कलकल एक मधुर संगीत है… जो शांत मन को सुना रहा आने वाला कल है।

उम्मीदों से भरे सुकून पाने में लगे बरसों हैं… मिल जाए वो, जब लहराए खेत में सरसों है।

फूलों को देख भवरें और तितली मुस्कुराई है… पाने की नहीं देने की ताकत फूल ने ही तो सिखाई है।

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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