Uncategorized
Trending

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए” जैसी नायाब शेरो शायरी और उर्दू अदब के बड़े शायर बसीर बद्र का इंतकाल साहित्य जगत की एक बड़ी क्षति

भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश

मशहूर शायर और आधुनिक ग़ज़ल के उस्ताद डॉ. बशीर बद्र का लंबी बीमारी और डिमेंशिया के बाद 91 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन हो गया है।उनके निधन से साहित्य और उर्दू अदब की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से पीड़ित थे और उनकी याददाश्त चली गई थी।उन्हें उर्दू गजल को आम बोलचाल की सरल, रूमानी और बेहद प्रभावशाली भाषा में लिखने के लिए जाना जाता है। बशीर बद्र का जन्म 19 फरवरी 1935 को अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और उर्दू साहित्य की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी शायरी में प्रेम, विरह, अकेलापन और इंसानी रिश्तों की गहरी संवेदनाएं देखने को मिलती हैं। वर्ष 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था, जिसके बाद वे भोपाल आकर बस गए। इस दर्दनाक घटना ने उनकी रचनाओं को और अधिक भावनात्मक तथा संवेदनशील बना दिया। उनकी ग़ज़लों में दर्द, मोहब्बत और जीवन की सच्चाइयों का अनूठा संगम दिखाई देता था। बशीर बद्र अपनी रोमांटिक और दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
उनकी मशहूर पंक्तियाँ दिलों दिमाग पर गहरा असर डालती है। जैसे-
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।”
“मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ रहती है, कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता।”
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।”
“दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है,
जो भी गुज़रा है उस ने लूटा है।”
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।”
“कोई हाथ भी न मिलाएगा” और “उजाले अपनी यादों के” जैसे उनके शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं और साहित्य प्रेमियों के दिलों में खास स्थान रखते हैं। उनकी प्रसिद्ध किताबों में ‘इमकान’, ‘आहटें’, और ‘उजाले अपनी यादों के’ शामिल हैं। उनके द्वारा कहे गए कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं, जैसे- “न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।””कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।” उर्दू अदब के बड़े शायर बशीर बद्र साहब का इंतक़ाल होना उर्दू और हिंदी के लिए बहुत बड़ा खालीपन हो गया है।साहित्य और उर्दू शायरी में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा था। उनकी ग़ज़लें और शेर आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *