
ये शब्द ही तो है।
जो दिलों को जोड़े रखते है।
कभी हम उनसे कुछ कहते है।
कभी वो हमसे कुछ कहते है।
एक दूजे के दिल के राज।
ये शब्द ही तो खोलते है।
तभी तो रक्त बंधन के साथ-साथ।
कुछ पराए भी अपने महसूस होते है।
जो मौन होकर रहते है।
वे दिल ही दिल में घुटते है।
तभी तो मंजू के ये शब्द कहते है।
ये शब्द ही तो है।
जो दिलों को जोड़े रखते है।
हां दिलों को जोड़े रखते है।।
मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)













