Vijay Kumar
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साहित्य
सृष्टि की रचयिता
मां शब्द में ही सारी सृष्टि समायी हैईश्वर ने स्वयं ही मां की महिमा गायी है**हर प्राणी में ईश्वर अंश…
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साहित्य
महाराणा प्रताप की जयंती
प्रसिद्ध हैं ये कथ्य धरा मे आज भी,कि घास रोटी खाई ,जारी रखी लड़ाई ,ना झूके कभी वो मुगलों के…
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साहित्य
माँ
माँ की महिमा लिखा न जाए ममतामई महान है।माँ ही कलम दवात है और माँ ही गुरु ज्ञान है।।माँ से…
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साहित्य
पल दो पल
पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो। ना तुम कुछ कहो, ना…
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साहित्य
व्यर्थ की चिंता क्यों करो
जिंदगी है चार दिनखुशियों से इसे भर लोतेरा मेरा के चक्कर मेंव्यर्थ की चिंता क्यों करो।जग में जब आये हैतो…
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साहित्य
अंतहीन उड़ान
अंतहीन उड़ान की सैर करना चाहती हूँ।मैं इस विश्व में खूब घूमना चाहती हूँ।। मेरे मन का पंछी आजकल नियंत्रण…
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साहित्य
माँ
माँ,तुम अब मेरे पास नहीं हो,तो ये घर सिर्फ दिवारों का ढांचारह गया है,तुम्हारी आवाज,प्रभात की वो रोशनी थी,जो थके…
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साहित्य
गजल
तुम्हारी याद की बारात ही दिल को लुभाते हैं,सबेरे की सुनहरी धूप से आँगन सजाते हैं। कभी जो दर्द मिलता…
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साहित्य
मां जी गई वह दुनिया,
मां जी गई वह दुनिया,जिसे जीते हैं सभी संत।मौत भी न पा पाईं,प्रेम का अंत,अनन्त। वह छण कैसा दुर्लभ होगा,प्रथक…
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साहित्य
सशक्त हस्ताक्षर का चतुर्थ वार्षिकोत्सव 10 मई को होगा
जबलपुर - संस्कारधानी जबलपुर की क्रियाशील साहित्य संस्था का चतुर्थ वार्षिकोत्सव समारोह दिनांक 10 मई 2026 को कलाविथीका रानी दुर्गावती…
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