Vijay Kumar
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साहित्य
मत पालो ऐसाभ्रम
मत पालो ऐसा भ्रमसमय पर समय कोई क्यूं कर देगा मुझकोसब ढकोसला है मत आग में झोंको खुदकोअपने तभी अपने…
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साहित्य
धरती का शृंगार करें
हरित चुनर ओढ़े वसुधा, अनुपम रूप निखार रही,मंद समीर संग प्रकृति अपनी छवि मनोहर सँवार रही।तरु-पल्लव जीवन के प्रहरी, सुख-शीतल…
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साहित्य
मोल लगा लो
ऊँचे महल की नींव भी मिट्टी होती है,शायद कल को ये मिट्टी ही आसमान छू ले।आज धूल समझकर पाँव से…
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साहित्य
मेरे पिता मेरा स्वाभिमान।।
जिनके सहारे चलती मेरी दुनियां है,जो अंगुली पकड़ मुझे चलना सिखाते हैंजब भी मुझसे कोई गलती होती हैं,वो मुझे डांट…
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साहित्य
एक पूर्ण अस्तित्व हो पापा
कैसे कर लेते हो तुम ये सब,अपूर्ण को भी पूर्ण कर देते हो।एक पूर्ण अस्तित्व हो पापा,घर की हर नींव…
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साहित्य
पीर सुनेगा कौन?
निर्दोषों का बस यहां,रोज हो रहा खून।अंधा बहरा हो गया,लगता अब कानून।। दोषी निधड़क घूमते, पुलिस प्रशासन मौन।पीड़ित मानव की…
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साहित्य
पापा : स्मृतियों में अमर, हृदय में सदैव जीवित
25 फरवरी 2024, रविवार कृष्ण पक्ष का वह काला दिन,जब आप हमें छोड़कर अनंत यात्रा पर बिना कुछ कहे निकल…
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साहित्य
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घनाक्षरी
तन स्वस्थ रहे जबरहे मन खुश तबदिनचर्या नियमितअपनी बनाइए।शाक फल उपभोगसातों दिन करें योगतन को निरोगी रखेंटहलने जाइए।मसालों से दूर…
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साहित्य
प्रेम की सरहद जहाँ ख़ामोश हो जाती है
प्रेम की सरहद जहाँ ख़ामोश हो जाती है,वहीं राधा की दृष्टि कृष्ण बन जाती है। न मिलन की खुशी, न…
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साहित्य
योग जीवन का मूल मंत्र
विषय- अंतराष्ट्रीय योग दिवसविधा कविता योग है जीवन का आधार,इसका जीवन में है बड़ा उपकार lहर दिन जो योग अपनाता…
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