Vijay Kumar
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साहित्य
पक्ष विपक्ष दुश्मन बन बैठे हैं
जल में रहकर मगरमच्छ से बैर,उन शैतानों के भी होते हैं दो पैर,बिना किसी प्रतिबंध वे घूम रहे हैं,छोटी बड़ी…
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साहित्य
कर्म कर, फल की इच्छा न कर
पक्षी तो बिना किसी नक़्शे केअपने गंतव्य तक पहुँच जाते है,पर हम इंसान दिल से दिल तकपहुँचने में प्राय: नाकाम…
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साहित्य
महाराणा प्रताप
(मुक्त छंद) अरावली की चोटियों परआज भी गूँजती है एक हुंकार—“स्वाभिमान कभी झुकता नहीं।”यह स्वर किसी साधारण राजा का नहीं,मेवाड़…
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साहित्य
महाराणा प्रताप
सूर्यवंश मे जन्मे बलिष्ठ कद काठी के क्षत्रिय वो मेवाड़ के राणा प्रताप थेमुगलों के दांत खट्टे कर दे ऐसे…
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साहित्य
भावनाओं के पंख
ओमपाल सिंह भावनाओं के पंख लगाकर,मन अक्सर उड़ जाता है,कभी खुशी के नीले अम्बर में,कभी दर्द में खो जाता है।…
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साहित्य
प्रेम – मधुरिमा
जब प्रेम-मधुरिमा मन की वीणा पर झंकृत हो जाएगी,भावों की अनजानी सरिता अंतर्मन में बह जाएगी।नयनों की चंचल पंखुरियों पर…
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साहित्य
मां होती है जन्नत का फूल
मां होती है जन्नत का फूलममता लुटाती मां का है उसूलमां का प्यार होता है अनमोलनहीं चुका सकता है कोई…
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साहित्य
महिला नेतृत्व, एक नए युग की शुरुआत
आज जिंदगी की भागम -भाग मेंमहिलाएं कहां किसी से कम हैंबिल्कुल महिला का नेतृत्वएक नए युग की शुरुआत हैआजादी के…
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साहित्य
विरह का गहराव
सुनो, प्यार में तुम्हारे अब बदलाव हो रहा है,धीरे-धीरे धुएं के छल्लों में ढलाव हो रहा है।सूर्य की तरह बाहों…
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साहित्य
मंगलाचरण
जो सुमिरत सिधि होई,गन नायक करिबर बदन।करउ अनुग्रह सोइ,बुद्धि रासि सुभ गुण सदन।। मुक हो ई बा चाल,पंगु चढ़ई गिरवर…
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