Vijay Kumar
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साहित्य
जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें
जिंदगी छोटी न बड़ी चाहिए साहेब बस कुछ कहानी अमर चाहिए साहेब। अपनों का बराई न गैरों की बुराई चाहिए…
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साहित्य
पिता
नित निज जो पित्त जलाता ,पित्त जला पुत्र को जगाता ,अंबर सा जो बनता छाया ,वही तो है पिता कहलाता…
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साहित्य
हे पिता
हे पिता, तुम जब तक थे,मैं नींद चैन की सोता था।अपनी मर्जी का मालिक था,अपने दादू का पोता था। तुम…
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साहित्य
अंत जब जीवन के द्वार खटखटाता है,
अंत जब जीवन के द्वार खटखटाता है,मन अक्सर भय और शोक से भर जाता है,लगता है जैसे सब कुछ पीछे…
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साहित्य
घन बना दुल्हा
करने को प्यार ,कर रहे शृंगार ,नभ हुआ तैयार ,घन है बेकरार ।धरा दुल्हन बन ,घन आया दुला तन ,छक्का…
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साहित्य
ज्ञान और विज्ञान से खुलेंगे हनुमान जी के जन्म रहस्य, बोलतीं कलम मंच से मनन से
मानस कार्यक्रम का नवीन सत्र शनिवार को उत्साहपूर्ण ढंग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संजय राय साईं ने किया…
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साहित्य
आदित्य शत्रु नहीं मैंने बनाया है
मन में पूरा विश्व समाया हुआ है,पर भीड़ में कोई दिखता नहीं है,यहाँ सामान्य व्यक्तित्व कहाँ है,हर चेहरे के पीछे…
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साहित्य
पितृ-योग-संगीत त्रिवेणी से आलोकित हुई २५४वीं कल्पकथा काव्यगोष्ठी
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
रूप दिगंबर धार के, शंभु बसे कैलाश।डम-डम डमरू बाजता, स्वर गूंँजे आकाश।गले वासुकी माल है,चंद्र विराजे शीश,जो आता प्रभु द्वार…
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साहित्य
अहंकार बनाम् घमंड
जिस पर अहंकार का साया होता हैउसके लिए अपना भी पराया होता हैअहंकारी यहां कहां कोई होता हैसब अपनी किस्मत…
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