Vijay Kumar
-
साहित्य
कौशल्या नंदन
विधा : कविताहे कौशल्या नंदन ,है तेरा अभिनंदन ,तेरे कोमल चरणों ,है सादर तुझे वंदन ।हे कौशल्या नंदन ,हे दशरथ…
Read More » -
साहित्य
पौत्र
विधा : पद्य दादा का प्यारा ,दादी का दुलारा ,पापा का सहारा ,मम्मी का तारा ।मम्मी की म्याऊॅं ,पापा का…
Read More » -
साहित्य
अधिकार और कर्तव्य
विधा : आलेखदिनांक : 8 मई , 2026 ईश्वर के द्वारा सृष्ट प्राणियों में मानव को विवेकशील प्राणी बनाया गया…
Read More » -
साहित्य
मां की ममता
माँ तेरे आँचल में छिप जाऊँ मैं,तेरी ममता की छाँव में मुस्काऊँ मैं। दुनिया की धूप जब मुझको सताती है,तेरी…
Read More » -
साहित्य
गुरु वंदना,
बं दउं गुरु पद पदुम परागा,सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।अमीअ मूरिमय चूरन चारू,समन सकल भव रूज परिवारू। । सुकृति संभुतन विमल…
Read More » -
साहित्य
यादों का पुराना संदूक
मन का एक कोना खालीआज भी संजोकर रखती हूं।कहीं भर ना जाए वह कोनाआज भी कोशिश करती हूं। यादों का…
Read More » -
साहित्य
माँ- मेरा पहला संसार है
विधा – कविताशीर्षक- माँ की ममता माँ की ममता की छांव में,जीवन मेरा धन्य हो जाता है lतेरे ही आँचल…
Read More » -
साहित्य
भाग 2(खड़ावदा की आवाज)
कविताहमारे जनप्रतिनिधियों को कवि गोपाल जाटव विद्रोही का राम रामहमारे घर के सामने है रास्ता आमअक्सर हमारे घर के सामने…
Read More » -
साहित्य
माँ…
माँ, तू कैसे जान जाती हैमैं क्या कर रही हूँ हर पल,मेरे हर कदम की आहट कोकैसे पहचान लेती है…
Read More » -
साहित्य
माँ का आँचल : एक संस्मरण
मेरा सैनिक जीवन और मेरी दादी माँ, माँ मैं एक सैनिक हूँ,मैं अब रिटायर्ड हूँ,मेरी माँ की कहानी,मेरी अपनी जुबानी।…
Read More »









