Vijay Kumar
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साहित्य
अपने तो अपने होते है
अपने तो अपने होते हैं ,उसे पराये,हम क्यो समझते है?सुख दुख की हरेक घड़ी मे,अपने ही तो,पास आते है ।…
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साहित्य
शिव की महिमा
विषय- महीना शिव काविधा- कविता आज नहीं तो कल बनेंगे,मेरे बिगड़े काम lशिव शंकर पे मुझे विश्वास है,भोलेनाथ सुनते मन…
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साहित्य
कविता
कविता बेवजह उलझीं उलझीं सी रहे तो उम्र, हंसने हंसाने में कट जाऐं तो जिंदगी, उदास हो कर काटते रहो…
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साहित्य
मैं तिलक हूं
मैं माथे का तिलक हूँ, पायल नहीं हूँ मैं,दिल पे चोट है मगर, बेहाल नहीं हूँ मैं।माँ-पापा के संस्कार, पहचान…
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साहित्य
कर्मों की गत न्यारी
नश्वर इस जग में सबजो जन्मा सो जाएगा …जाए कहां… नहीं पता किसी कोजाएंगे संग कर्मों के फलबूटा कर्मों बोया…
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साहित्य
श्रद्धा
मन के मंदिर में जब-जबविश्वास का दीप जलता है,ईश्वर तब पत्थरों में नहीं,हर धड़कन में मिलता है। श्रद्धा शब्द नहीं,जीवन…
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साहित्य
काव्य रस की सरिता संग मानवता का संदेश: ‘सुख़न का आशिया’ की गोष्ठी में कवियों ने राष्ट्रकवि को दी स्वरांजलि
”कांकेर (छत्तीसगढ़) की 7 वर्षीय आदिवासी बालिका ‘चांदनी’ (ग्राम-चरभट्टी) की शिक्षा के लिए भेंट किए दस हज़ार पाँच सौ रुपये”…
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साहित्य
रवीन्द्रनाथ ठाकुर : युगद्रष्टा रचनाकार
रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के ऐसे युगद्रष्टा रचनाकार थे, जिन्होंने शब्दों को संवेदना, विचार और…
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साहित्य
सावन और शंकर
सावन और शंकर का रिश्ता, यहाँ किसे भला ये ज्ञात नही।हुआ समुद्रमंथन निकला विषजिसे पीना सबके बस की बात नहीं।…
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साहित्य
विषय माँ
जिन आंखों में माँ की तस्वीर न हो वह आंखें सूनी लगती है, घर आंगन तो क्या कहें साहेब यह…
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