Vijay Kumar
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साहित्य
वीर रस में रचना: “खड़ावदा की ललकार”
हुंकारआज भी खाली रहते खड़ावदा के कई मंच,बहुत से कार्यक्रम में नहीं पहुँच पाते हमारे सरपंच।जनपद प्रतिनिधि न जाने कहाँ…
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साहित्य
घर से दूर थे वो
घर से दूर थे वो, सपनों के शहर में,माँ-बाप की उम्मीदें थीं उनकी नज़र में। पढ़ने गए थे, कुछ बनकर…
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साहित्य
पितृ दिवस
ओ मेरी बिटिया,ओ मेरी प्यारी बेटी,तूने कितनी ही मुश्किलें झेलीं,कितने ही तूफ़ानों से बेख़ौफ़ लड़ी।फिर भी हर बार,तू और मज़बूत,…
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साहित्य
सहारा
दिग्पाल छंद मैंने तुम्हें पुकारा,दे दो मुझे सहारा।नइया फँसी भंँवर में,कैसे मिले किनारा।।रघुवर करूंँ विनय है,प्रभु साथ दो हमारा।मझधार से…
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साहित्य
दाम बढ़े, सपने घटे
दाम बढ़े, सपने घटे, कैसी चली बयार,महंगाई के इस मौसम में, रोता हर परिवार। दाम बढ़े, सपने घटे, कैसी चली…
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साहित्य
गौ माता
गौ माता तुम प्यारी हो,सब जीवों से न्यारी हो।ममता की मधुर छाया बन,हर आँगन की फुलवारी हो। शांत स्वभाव, सरल…
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साहित्य
अतरंगी शायरी
नाराज होकर तुमसे मुझे क्या मिलेगा और नाराज होकर मुझसे तुम्हें क्या मिलेगा। थोड़ी सी खून के आंसू तुम बहाओगी…
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साहित्य
झुलसे हुए वादे
एक सवाल जो राख से उठता है सुलगती सी उम्मीदों में उलझ कर रह गए देखो,मौत के व्यूह में बच्चे…
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साहित्य
एक अधूरा सपना
कल तक जिन आँखों में सपनों का उजाला था, आज उन्हीं राहों पर दर्द का अँधियारा है। जो घर से…
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साहित्य
हनुमंत स्तुति
पावन संकट हरन तुम, महिमा अतिशय पार।करहु कृपा अब देव तुम, नैया कर दो पार ॥ अंजनी-सुत संकट-हरन, पावन तेरी…
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