Vijay Kumar
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साहित्य
लो, फिर एक और अग्निकांड…
कुछ खबरें केवल समाचार नहीं होतीं, वे भीतर तक झकझोर देने वाला दर्द बन जाती हैं। एक आग की राख…
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साहित्य
मुफ़्तखोरी बुरी चाहत
जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो,तो समझना चाहिये कि इसकी कोईबड़ी कीमत पाने वाले को चुकानी है,उनकी आज़ादी भी…
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साहित्य
महान रानी दुर्गावती
गौंड की महारानी थीएक बहादुर क्षत्राणी थीनाम था उनका दुर्गावती महिला वो स्वाभिमानी थीगौंड की महारानी थी चंदेलों की सुकुमारी…
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चेहरों की मुस्कान और शब्दों की मिठास हमेशा सच्चाई का प्रमाण नहीं होती।
यह कविता समाज के उन अनदेखे पहलुओं पर एक विनम्र दृष्टि है। शीर्षक _लब्ज़ों की दुकान चेहरे से पहचान नहीं…
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साहित्य
सौदागर-ए-साहित्यजहाँ लफ़्ज़ बिकते हैं, रूह नहीं
वाह रे साहित्य के सौदागर,तूने तो रूह को भी बेच खाया।शायर के लहू से स्याही बनाई,और हर कतरे का मोल…
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साहित्य
एक दिन सब छूट जाएगा
एक दिन सब छूट जाएगा,माँ की उँगली, माँ के आँचल की छाँव,वो आँगन जहाँ चलना सीखा था,जहाँ पहली बार गिरे…
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साहित्य
राम दर्शन की चाह
चरण- कमल की वंदना , राम -नाम विश्वास। राम -सिया छवि उर बसे , रखिए शुभ की आस।। मंगल बेला…
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साहित्य
सवाल-ए-इश्क़
जहाँ दिल हारकर भी जीत गया आगे सफर था, पीछे हमसफ़र था।ठहरता तो सफर छूट जाता,बढ़ता तो हमसफ़र छूट जाता।मंज़िल…
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साहित्य
नसीब अपना-अपना
जिंदगी वहीचलता रहे शरीर … अच्छी कहो तकदीरये तकदीर बनती है बनाए सेजो कर्म किये थे कभी ( पूर्वजन्म )या…
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साहित्य
उषा टिबड़ेवाल “मीरा” कोभागीरथी हिन्दी विद्यापीठ की ओर से मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
हरिद्वार। साहित्य और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतिडॉ उषा टिबड़ेवाल “मीरा”को भागीरथी हिन्दी विद्यापीठ एवं शोध…
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