Vijay Kumar
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साहित्य
रवीन्द्रनाथ ठाकुर : युगद्रष्टा रचनाकार
रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के ऐसे युगद्रष्टा रचनाकार थे, जिन्होंने शब्दों को संवेदना, विचार और…
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साहित्य
आदिवासी—माटी की आवाज़
माटी की ख़ुशबू में जिनका,सदियों से संसार बसा,जंगल जिनका अपना आँगन,नदियों में जिनका प्यार बसा। धरती माँ की गोद सँभाली,प्रकृति…
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साहित्य
कविता
कल किसी नये मेहमान से मुलाकात हो गई, दो पलों में हि दिल की बात हो गई, कुछ उसने सुनाई…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद मुक्तक
नैतिकता की परिभाषाएंँ, जग में सबकी अपनी-अपनी।कर्मों का फल सबको मिलता,जैसी जिसकी होती करनी।निश्छल भावों से जो रहता,भोले उस पर…
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साहित्य
सावन की बहार
दामिनी चमके मेघा गरजे,झूम झूम के बहे पुरवाई!रिमझिम रिमझिम बरसे सावन,हर्षित मन पुलकित तन भाई!! सावन की बहार है आई!…
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साहित्य
सावन का महीना
काले-काले बादल आए, लेकर शीतल पवन,धरती की प्यास बुझाने, बरसा रिमझिम सावन।मिट्टी से उठी खुशबू, मन को बहुत सुहाती है,पेड़ों…
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साहित्य
मैं क्या हूँ, क्यों हूँ, कौन हूँ?
मैं कौन हूँ, क्यों हूँ, क्या हूँ – यह प्रश्न लिए चलता हूँ,भीड़ में रहते हुए भी, हर पल खुद…
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साहित्य
राह, नया उजास
शीर्षक:राह, नया उजास बदलाव तभी सार्थक है, जब सोच नई हो जाए,मन में आशा का दीप जले, हर राह सरल…
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साहित्य
दीप
मैं दीप हूँ,हर दिशा अंधेरों की चादर ओढ़े,एक दीप की रोशनी उस अँधेरे को चीर कर अपनी बाहों में प्रकाश…
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साहित्य
जीवन सन्ध्या
वह सुबह कभी न आएगीये रैन न अब कट पायेगीआज विभ्रम की बेला मेंजीवन सन्ध्या ढल जायेगी मंझधार हमारे भीतर…
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