Vijay Kumar
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साहित्य
मां तो मां होती है
मां तो मां होती है,मां ममता कि मूरत होती है,मां शिवा दुनिया अधूरी है,मां के ममत्व प्रेम से संतानपूरी है,मां…
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साहित्य
माँ की दिव्यता
माँ जिसकी बराबरी कोईकर नहीं सकताउसकी जगह को कोईकभी भर नहीं सकतावह इस दुनिया कीअद्भुत कृति हैउसके मन में नहींकोई…
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साहित्य
ओइम परमात्मा
मां जन्मदात्री है, एक अक्षरीय रिश्ता अनुपम , अनुपमेय बरगद के वृक्ष सम जीवन के ताप में शीतलता प्रदान करता…
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साहित्य
कवि डॉ. नीरज चौधरी “नीर” हुए संस्कारधानी जबलपुर में सम्मानित
संस्कारधानी जबलपुर में चतुर्थ वार्षिकउत्सव के अवसर पर कवि संगम त्रिपाठी जी संस्थापक हिंदी प्रचारिणी सभा एवंसशक्त हस्ताक्षर के संस्थापक…
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साहित्य
माँ: कुंडलियाँ छंद
माता ममता खान है,मां कोमल एहसास।माँ ही सचमुच ईश है,मां सुख का आभास।। माँ सुख का आभास,मित्र और प्रथम गुरु…
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साहित्य
माँ
माँ, तू कैसे जान जाती हैमैं क्या कर रही हूँ हर पल,मेरे हर कदम की आहट कोकैसे पहचान लेती है…
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साहित्य
माँ : ईश्वर का अलौकिक रूप
सूर्य सा उज्ज्वल रूप होती है मेरी माँ,ममता की सजीव मूरत होती है मेरी माँ।जिसके आँचल में हर दुख खो…
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साहित्य
मैं कौन हूं
‘मैं कौन हूॅं ‘ एक अहम रहा सवाल।ढूॅंढ चुकी इसका जवाब मिला नहीं हल।अपने अस्तित्व पर लगी रही हर पल…
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साहित्य
मातृ दिवस
विषय- मैं ओर मेरी बूढ़ी माँविधा- गध एवं मुक्तक जिन्दगी का हर कोई तलबगार नही होतासूरत-ए-इश्क़ का एतबार नही होता…
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साहित्य
माँ : तेरी यादों का आँचल
माँ की यादें आज मुझे फिर बहुत रुलाती हैं,बीते बचपन की मीठी बातें मन में मुस्काती हैं।तेरा हँसता भोला चेहरा…
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