Vijay Kumar
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साहित्य
राष्ट्रकवि दिनकर : मशाल ज्योति अखंड ज्ञान की
राष्ट्रकवि दिनकर, तुमने हिंदी जग में,जलाई मशाल ज्योति अखंड ज्ञान की।अन्याय के विरुद्ध उठी कलम तुम्हारी,बनकर अजेय धार महान प्राण…
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साहित्य
आँगन में दीवार
विधा – काव्य भौतिकता की आंधी में अहम हावी हो गयारिश्ते नातों पर झूठी शानोशौकत का नशा चढ़ गया आपसी…
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साहित्य
जयपुर की कथाकार नेहा शर्मा वर्षा कल्प मंजूषा प्रशस्तिपत्रम से सम्मानित।
परिवर्तनी एकादशी पर सजा कल्प कथा मंजूषा मंच। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य…
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साहित्य
जब दर्द हो गया भजन”
स्वप्न सजदा हुआ तो हवन हो गया,नैन झरने बहे तो आचमन हो गया।ख्वाब महका तो जैसे चंदन हो गया,अश्क़ ढलके…
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साहित्य
किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँ
किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँबहुत अपना था जो,उससे किनारा हो गया हूँना जाने किसलिए आँखें अभी तक…
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साहित्य
सूना कर घर बार कहाँ मुँह मोड़ चले
सूना कर घर बार कहाँ मुँह मोड़ चलेपंछी तो अब नीड़ हमारा छोड़ चले आँगन चौखट दरवाज़े देखें रस्तासबसे रिश्ते…
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साहित्य
सरल नहीं
सरल नहीं यूं ,अपनी बात रख पानाविचारों के ववंडर को ,धार दे पाना ।। कोई भाव आते आते, जुबां लड़खड़ाती…
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साहित्य
किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँबहुत अपना था जो,
किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँबहुत अपना था जो,उससे किनारा हो गया हूँना जाने किसलिए आँखें अभी तक…
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साहित्य
सूना कर घर बार कहाँ मुँह मोड़ चले
पंछी तो अब नीड़ हमारा छोड़ चले आँगन चौखट दरवाज़े देखें रस्तासबसे रिश्ते नाते जैसेतोड़ चले धूप सुनहरी आज जलाती…
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साहित्य
पूर्णिका
पूर्णिका जिंदगी में इश्क की शुरवात तो होगी।एक दिन उसी से मुलाकात तो होगी।। चुप्पी आखिर कब तक एक हद…
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