Vijay Kumar
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साहित्य
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय
तुम्हें देख कर अंकुरित प्रणयमानों धरती पर सावन की फुहारजब पहली बार नजरों से नजरें मिली मिलती है तो मन…
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साहित्य
कल्पकथा साहित्य संस्था का मासिक सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी आयोजित
मां की ममता, राष्ट्रभाव, सनातन संस्कृति के आलोक में देश विदेश से जुड़े हिन्दी साहित्य प्रेमी सम्मानित प्रभु श्री राधा…
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साहित्य
मां तेरे रूप हजार
हजार दुःख सह कर मां ने हमेदिव्य जीवन का सुख दिया ।सीता और मीरा बन कर उस मां नेकभी अग्नि…
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साहित्य
जननी (मां)
तुम हो स्वर्ग से बढ़कर जननी,तुम्हारे समान माँ कोई न अपनी तेरी सूरत, तेरी सीरत,हर देवी की लगती मूरत।जग की…
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साहित्य
असफलता डराती है
काम्पिटिशन अब बहुत बढ़ गया,वेकेन्सियां कम आती हैं।मेहनत करने के बाद भी,असफलता मिल जाती है।नकारात्मकता जन्म है लेती,उम्र भी हमें…
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साहित्य
ममता की छाँव में
गीत सृजन मुखड़ाऐ माँ तेरी सूरत से अलग,भगवान की सूरत क्या होगी।तेरे चरणों की धूल जहाँ हो,वो धरती ही जन्नत…
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साहित्य
पुंसवन संस्कार
{गर्भाधान संस्कार की पद्धति गर्भाधान संस्कार प्रयोग गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तक संस्कार प्रकाश को देखें}वास्तव में गर्भाधान संस्कार करना…
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साहित्य
ग़ज़ल
जैसा हूँ वैसा दिखता हूँ।महँगा हूँ सस्ता बिकता हूँ। मुझसे यूँ हैरान हैं सारे,मैं बातें सच्ची कहता हूँ। फुल्का हूँ…
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साहित्य
माँ — ईश्वर की अद्भुततम रचना
माँ की रचना अकल्पनीय, ईश्वर से भी न्यारी है,सृष्टि की सबसे सुंदर मूरत, जग में सबसे प्यारी है।प्रकृति की हर…
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साहित्य
अधूरी प्रीत का कबीर
मनवा लागो तोहसे रे, पर तोहे खबर न होय,हमरी सांसन में तू बसे, तोरे मन हम न कोय।नैनन बाट निहारते,…
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