Vijay Kumar
-
साहित्य
अमीर और अमीर होता जा रहा है
आज विश्व में अमीर ग़रीब काफ़ासला बहुत बढ़ता जा रहा है,अमीर और अमीर होता जा रहा,ग़रीब और गरीब होता जा…
Read More » -
साहित्य
चेतक वाला रंगेला
खाटू श्याम की सोंधी खुशबू साँसों में भर लाया हूँ,और तुम्हें हँसाने के खातिर मैं बड़ी दूर से आया हूँ।डबल…
Read More » -
साहित्य
दिलों में छुपी हर बुराई मिटाना है
हे ईश्वर! हम पर कृपा को बरसाना हैदिलों में छपी हर बुराई को मिटाना हैमेरे दिल में व्याप्त तमस को…
Read More » -
साहित्य
रुके नहीं ,झुके नहीं,आगे बढ़ें
हे मानव! निरंतर अग्निपथ पर चलते हुए आगे बढ़ोरुको नहीं झुको नहीं, बस आगे बढ़ते रहोतुम्हारी मंजिल तुम्हारा इंतजार कर…
Read More » -
साहित्य
माता-पिता
धरती के भगवान और हमारा परम कर्तव्यआज के समय में एक बहुत ही दर्दनाक चलन देखने को मिल रहा है।…
Read More » -
साहित्य
चल आजा रे बेवफा
चल आजा रे बेवफा तेरी बेवफ़ाई का आज कुछ किस्सा लिख रहा हूँ कुछ अपने हिस्से का कुछ तुम्हारे हिस्से…
Read More » -
साहित्य
विश्व मित्रता दिवस पर
नफ़रतों के दौर में मोहब्बत का पैग़ाम बनें,हम सब एक-दूसरे के लिए एहतराम बनें। रिश्तों की भीड़ में जो दिलों…
Read More » -
साहित्य
गंगा एक ऐसी फिर से निकलनी चाहिए
बहुत धोती रही है गंगा अबतक,पापियों के पापों को, नष्ट करती रही है सबके,श्राप ताप संतापों को, अब पापी को…
Read More » -
साहित्य
दिल की किताब ….
दिल की किताब में, तेरा ही नाम है,हर एक धड़कन पर, तेरा पैगाम है।कैसे कहूँ तुझसे, कितनी मोहब्बत है,मेरे लिए…
Read More » -
साहित्य
क्रोध
जिंदा में आत्मविश्वास खोने सेअहंकार की बातें बोलने सेमूर्खत्व से वाद विवाद करने सेआत्म निग्रह नियंत्रण न होने सेइससे क्रोध…
Read More »









