Vijay Kumar
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साहित्य
वसुधैवक़ुटुम्बकम् की सोच
बसुधैवक़ुटुम्बकम् की सोच,बहुत ही पुरानी सी लगती है,इस विचार पर बात करना भी,बहुत ही अजीब सी लगती है। यह सारा…
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साहित्य
नेति नेति : चरैवेति चरैवेति
वेद, पुराण, उपनिषद सारेब्रह्माण्ड का ज्ञान बखान रहे,किंचित नेति नेति के प्रतिफल,चरैवेति चरैवेति स्वीकार रहे।धर्म से अर्थ का अर्जन कर,काम…
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साहित्य
नव गीत
कोरे कागज की छाती पर,पीर हृदय की लिख डाले।। सूनी साँझों के द्वारे पर,यादों के दीपक जलते,टूटे सपनों की किरचों…
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साहित्य
कविता
उभर के दिल से बही आंखों से होकर गुजरी।वो धारा प्रेम के मोती भी पिरोकर गुजरी।। मिज़ाज वक़्त का रूठा…
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साहित्य
यशोदरा
लो यशोधरा आज द्रवित हुईउसके हिस्से में जमीन आई,बुद्ध ने राह पकड़ ली ईश्वर कीछोड़ गए उसके लिए जग हसाई…
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साहित्य
शिक्षक
सभ्य समाज में बदलावबच्चों की पढ़ाई में बदलावव्यक्तियों के चरित्र में बदलावसभी विचार में बदलावशिक्षक के द्वारा साध्य होता। डॉ…
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साहित्य
सूरज उगले आग
विधा : पद्य भाग भाग धूप से भाग ,दिवा अजगर सा नाग ,जल रहे जैसे ये बाग ,देख सूरज उगले…
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साहित्य
समाज सुधार: मुफ्त की सहायता
क्या कभी इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा,कौन चांदी के चम्मच के साथ पैदा होते हैं,और वहीं कुछ गरीब की…
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साहित्य
विश्व कछुआ दिवस।।
धैर्य,सफलता का प्रतीक है,उस कछुए की बात करते है।मिलकर आज हम सब यहाँ,विश्व कछुआ दिवस मनाते है।। शनै शनै वो…
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साहित्य
विश्व भाई दिवस पर बधाई
भाई मेरा साया, मेरी ढाल है प्रेम डोर से बँधा, रिश्ता भाई का,सबसे अनमोल और सबसे सच्चा,लड़ाई, झगड़ा भी भाई-भाई…
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