Vijay Kumar
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साहित्य
भैय्या
मानव जीवन अद्वितीय होता हैछोटे बड़े से लोग गृह में रहते हैपिता घर के अधिपति होते हैपिता के बाद भैय्या…
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साहित्य
भाई जैसा प्यारा नहीं
रचनाकार-सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर भाई जैसा प्यारा नहीं इस जग में कोई,बन्दे फिर जग में क्यों तेरी आत्मा सोई।…
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साहित्य
कविता
बिखरे-बिखरे से इशारे,हर ओर नज़र आ जाते हैं,कभी दीपक की लौ बनकर,अंधेरों में राह दिखाते हैं। कभी सुबह की पहली…
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साहित्य
जिल्लत
जिल्लतों पर तासूर ज़िंदगी हमारी हैवो हमसे पूछतें तुम्हे क्या बिमारी है गमों मे हंसते है उन्होने हमे मौजिया समझ…
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साहित्य
बोलों हरे कृष्णा
दया धर्म के भाव मन में जगाए रखना।बोलों हरे रामा हरे रामा बोलों हरे कृष्णा।।इंसान से इंसानियत रखना न वैर…
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साहित्य
विश्व भ्रात दिवस पर अपने प्रिय निकुंजसेवी सहोदर को पत्र
प्रेषण माध्यम । परम पिता परमेश्वर नटवर नागर योगिराज श्री कृष्ण प्राण से प्रिय मेरे सहोदर, आज हृदय की प्रत्येक…
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साहित्य
जल जंगल बचाओ लोगो
हमारी बस्ती में आजकल,चिड़िया बहुत चहचहाय रही हैं।जो पेड़ लगाए हैं बुजुर्गों ने,फल ये पीढ़ी खाय रही हैं।। जंगल बचा…
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साहित्य
स्त्री की व्यथा
जीने की चाह नहीं हैहर पल मौत को बुलाती हूँ।जहर जैसी बातें सुनकरजहर को भी पचा लेती हूँ।बात कड़वी मगर…
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साहित्य
दुनिया मैसेज की
जिंदगी जीने का बदला सबबमोबाइल बिन नहीं जिंदगीअब तो बदल गया सबछोटा हो या बड़ा सब के हाथ में मोबाइलसरकारें…
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साहित्य
मन का आईना कोई काँच नहीं
मन का आईना कोई काँच नहीं,ये तो भीगी हुई एक ख़ामोश झील है,जिसमें हर एहसास लहर बनकर उठता है,और हर…
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