
रचनाकार-सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर
भाई जैसा प्यारा नहीं इस जग में कोई,
बन्दे फिर जग में क्यों तेरी आत्मा सोई।
समझ कर आगे बढ़ भाई से कर प्यार,
बन्दे तेरी जीत में बदलेगी तेरी हर हार,
भई की जुदाई में आत्मा क्यों नहीं रोई।
राम,लक्ष्मण,भरत,शत्रुघ्न से सीख लों,
चारों भाइयों में प्यार कितना देख लों,
करें द्वेष भैया से इंसानियत तेरी खोई।
शुद्ध कर विचार रख लें भाई का मान,
फ़रिश्ते होते हैं भाई सच को लें जान,
शराफत की क्यों उतर रही तेरी लोई।
समय रहते कीमत जान लें सदा भाई,
रिश्ता रक्त का तेरा तुम ही हो मां जाई,
एक कोख दो लाल मूर्ख उम्र तेरी होई।
भाई,भ्राता,भैया,सहोदर नाम अनेक,
प्रेम करो अग्रज,बन्धु से रखो विवेक,
राष्ट्रीय भाई दिवस पर आत्मा लें धोई।
स्वरचित और मौलिक गीत
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश













