
मानव जीवन अद्वितीय होता है
छोटे बड़े से लोग गृह में रहते है
पिता घर के अधिपति होते है
पिता के बाद भैय्या अधिपति थे।
वे पिता की तरह देखभाल करते हैं
सबसे मिलजुलकर जीवन बिताते हैं
अच्छे और बुरे विषय को समझाते हैं
ज्ञान के साथ नैतिक विषय बताते हैं।
भैय्या ने दिया दीपक घर की
सभी उलझनों को सुधार की
कुटुंब पोषण केलिए श्रम की
आदर्श जिंदा बनने के यत्न की।
भैय्या करता है भलाई सबकी
इससे मिला है कुटुंब की कीर्ति
भविष्य में उनके नाम है अमर
होता कि उनके जीवन सार्थक हो।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश













