Vijay Kumar
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साहित्य
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को नमन
सुर साम्राज्ञी का जीवन पूरा हो गयासरस्वती पूजा व आज माँ विदा हो गई,लगता है माँ सरस्वती अपनी सबसेप्रिय पुत्री…
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साहित्य
ऐसा लिखो जो समाज को जागृत करे। – कीर्ति त्यागी
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह…
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साहित्य
गुण-दुर्गुण
क्षमाशील जो जनउच्चतम महान क्षमा भाव ये गुणगुण पूर्वजन्म के कर्मों का फलक्षमाशील नहीं जो जनसामाजिक समरसता से वंचितये ही…
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साहित्य
जब मन में खिलता है बसंत।।
सर्वत्र खुशी जब छा जाती हैनिधियां पा ले जो जन अनंतदुख दर्द सभी हो जाते दूरजब मन में खिलता है…
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साहित्य
बीत रहे पलों संग सुनहरा हो कल
बीत रहे पलों संग सुनहरा हो कल यही फ़रियाद करते हैं।संपूर्ण विश्व में कामयाब जन की बुनियाद खड़ी करते हैं।।…
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साहित्य
सुलगता वर्तमान
महँगाई की बाढ़ में, डूब रहा हर गाँव,थाली में उत्सव कहाँ, अम्बर छूते भाव।मिलावट के मेले में, सच बैठा लाचार,रोटी…
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साहित्य
अंतरंगी शायरी
हम्माम मे मौजूद हर शख्स खुद को एहतराम के काबिल जानता हैखुदा तो नहीं खुदा से कुछ कम भी नहीं…
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साहित्य
दीपमाला
कैसे दीपमाला मैं सजाऊॅं ,कैसे लक्ष्मी को मैं बुलाऊॅं ,कैसे निज द्वार मैं सजाऊॅं ,मन हो पाता नहीं साफ है…
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साहित्य
शायद आज
शायद आज उनसे मिलन हो जाए,दिल के तार ज़रा और छिड़ जाए। कई दिनों से जो ख़ामोशी थी,वो आज लफ़्ज़…
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साहित्य
विप्रलंभ शृंगार की छायावादी रचना –भ्रमर-प्रणय
मिले ऊर्जा भंवरे कोतेरी आगोश मेंहे ! शतदल तेरी सुगंध में खोयाये प्रणय-सा प्रेम समर्पण चिरकाल सेभ्रमर ने ये गुनगुनाती…
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