Vijay Kumar
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साहित्य
अनोखी दिवाली
हुआ कुछ यूं इस बार , नहीं मनाया गया ,घर में दिवाली का त्यौहार । मन में आया एक ख्याल…
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साहित्य
अब जीने का हुनर मैं सीख गया हूँ
अब जीने का हुनर मैं सीख गया हूँ,सिर्फ झूठ बोलता हूँ — दिन भी, रात भी।क्योंकि सच बोल के कई…
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साहित्य
पूस की रात
पूस की रात केअनकहे किस्सेसुनाएं कैसे,नेत्र सजल होते।।होठ कांपते कुछबोल न पाते ।कंठ सूख जाताहाथ कंपकंपातेबेबस लाचारवृद्ध मां,चलने में अक्षम,हाड़…
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साहित्य
जब तक परिवार से जुड़ा रहता है
शब्द व व्यवहार ही मनुष्यकी असली पहचान होते हैं,चेहरा व ऐश्वर्य तो आज हैं,शायद कल नहीं रह पाते हैं। तकलीफ़ें…
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साहित्य
मां… तू बहुत याद आती है
लेखक – ओम कश्यप मां… तू बहुत याद आती है,तेरी बातें अब भी दिल को रुलाती हैं।तेरे बिना ये घर…
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साहित्य
समाधि पाद सूत्र– २४
क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः ईश्वर: । क्लेशकर्मविपाकाशयै:= क्लेश, कर्म, विपाक और आशय– इन चारों से; अपरामृष्टः= जो सम्बन्धित नहीं है; {तथा} पुरुषविशेष:=…
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साहित्य
समाधि पाद सूत्र–२३
ईश्वर प्रणिधानाद्वा । वा= इसके सिवा; ईश्वरप्रणिधानात्= ईश्वर प्रणीधन से भी {निर्बीज-समाधि की सिद्धि शीघ्र हो सकती है} । अनुवाद–…
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साहित्य
समाधिपाद सूत्र– 22
मृदुमध्यादिमात्रत्वात्ततोऽपि विशेषः । मृदुमध्याधिमात्रत्वात्= साधन की मात्रा हल्की, मध्य और उच्च होने के कारण; ततः= तीव्र संवेगवालों में; अपि= भी;…
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पल दो पल
पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो। ना तुम कुछ कहो, ना…
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साहित्य
सुई की नोक
सुई की नोक पर लटकी है मेरी रूह,एक झोंका हवा, और बिखर जाएँ आँसुओं के मोती।धागे-से बंधे हैं टूटते सपने,काँपती…
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