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  • मातृ दिवस

    विषय- मैं ओर मेरी बूढ़ी माँविधा- गध एवं मुक्तक जिन्दगी का हर कोई तलबगार नही होतासूरत-ए-इश्क़ का एतबार नही होता…

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  • माँ : तेरी यादों का आँचल

    माँ की यादें आज मुझे फिर बहुत रुलाती हैं,बीते बचपन की मीठी बातें मन में मुस्काती हैं।तेरा हँसता भोला चेहरा…

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  • माॅं की ममता

    विधा : पद्य माॅं की ममता ,माॅं की क्षमता ,दुनिया में कहाॅं ,माॅं संग समता ।माॅं ही शुभ दिन ,माॅं…

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  • मां के प्यार

    इस जहां में मां के प्यार जैसा प्यार नहीं है ।इस जहां में मां के दुलार जैसा दुलार नहीं है।।मां…

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  • माँ

    मां से सृष्टि का सृजन होतानवजीवन कि वह शिल्पकार।समस्त पवित्र संबंधों की निर्मातावात्सल्य की छाया अनुपम है स्नेह अपार। निस्वार्थ…

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  • अंतरराष्ट्रीय मातृदिवस

    तेरी याद बहुत माँ मुझको आती है,मीठी लोरी की धुन भी रुलाती है।तेरी याद बहुत माँ मुझको आती है।।अब भी…

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  • मातृत्व दिवस

    सिर्फ आज एक दिन यही नहीं,हर दिन माँ का एक समान।लेकिन एक बेटी ऐसी भी थी जिसने,दिलाया जग की हर…

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  • जीवन के उतार चढ़ाव

    विवेकशीलता, सकारात्मकताजिस जिसके विचार में होती है,प्राकृतिक सुविधाओं की सुखदप्रसन्नता सदा उन्हें प्राप्त होती है। उसके लिए प्रकृति और परमात्माके…

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  • नर वानरहिं संग कहु कैसे

    तुलसी ने कहा है मानस में।सीता ने पूँछा जब संशय में॥नर वानरहिं संग कहु कैसे।कही कथा भई संगति जैसे॥ अंतरु…

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  • माँ का दर्द

    आज से दस साल पहले,मैने,आंखो मे चश्मा पहने,तो, माँ की आंखो मे आंसू आ गये,कि,मेरे बेटे मे कमी क्या दे…

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