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  • भगवान

    (१) भ — भक्ति और भाव का स्वरूप “भ” से भक्ति जन्म लेती, मन हो जाता शांत,ईश्वर स्मरण करे जो,…

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  • अनुत्तरित प्रश्न

    उठते हैं, अनुत्तरित प्रश्न कई!कई, जिज्ञासाएं मचलती हैं ।मानव अभिलाषाएं ही अक्सर!नए अविष्कार करती हैं। उलझते प्रश्नों के झंझावातशांत कहां…

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  • गीता जयंती

    शीर्षक-अर्जुन का विषाद (सांख्य योग) ​अर्जुन का है विषाद महान,रथ के मध्य खड़े हैं मौन।तब बोले कमल नयन भगवान,मोह छोड़…

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  • ये आखिरी महीना “दिसंबर”

    शीर्षक – “जाता हुआ दिसंबर”विधा – कविता​खामोश खड़ा है आँगन में यह, जाता हुआ दिसंबर।दरवाज़े पर दस्तक देती, करवट लेती…

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  • जीवन की राह

    विधा – कविताश्रेणी – जीवनमौलिक रचनारचनाकार – कौशल जीवन एक सफ़र है प्यारा, हर पल इसका रूप निराला,कभी सूरज-सी तपन…

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  • मेरी मनपसंद सब्जी खाओ।।

    देखो सर्दी का मौसम आया है,ठंड से ठिठुरते लोगों को पाया है।किसी को अलाव तापते देखा है,कहीं किसी ने खाने…

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  • गीता का सार

    व्यक्ति को, आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ,गीता ही ,ले जाती है।जीवन के दुखों, भय और व्यर्थ चिंता से,गीता ही,मुक्ति दिलाती…

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  • ये आखिरी महीना ”दिसंबर”

    विधा- कविताशीर्षक- लो ठंड आई वर्ष का आखिरी महीना,दिसंबर आया है।ठंड की चादर ओड,दस्तक दे पाया है।। सूरज की धूप…

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  • संवेदना

    मन में धूप जगी जब, पावस भाव उमंग।संवेदित पुलकित मन, जागे कोमल रंग।। जीवन सफल वही है, जहाँ हृदय उदार।संवेदित…

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  • बाल कवियों की उर्वर कल्पना की उड़ान से सुरभित हुआ कल्पकथा काव्यगोष्ठी मंच।

    होनहार विरवान के होत चीकने पात कहावत मेधावी बाल प्रतिभाओं पर एकदम सटीक बैठती है – कल्पकथा परिवार प्रभु श्री…

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