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पितृ-योग-संगीत त्रिवेणी से आलोकित हुई २५४वीं कल्पकथा काव्यगोष्ठी
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु…
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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
रूप दिगंबर धार के, शंभु बसे कैलाश।डम-डम डमरू बाजता, स्वर गूंँजे आकाश।गले वासुकी माल है,चंद्र विराजे शीश,जो आता प्रभु द्वार…
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अहंकार बनाम् घमंड
जिस पर अहंकार का साया होता हैउसके लिए अपना भी पराया होता हैअहंकारी यहां कहां कोई होता हैसब अपनी किस्मत…
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मत पालो ऐसाभ्रम
मत पालो ऐसा भ्रमसमय पर समय कोई क्यूं कर देगा मुझकोसब ढकोसला है मत आग में झोंको खुदकोअपने तभी अपने…
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धरती का शृंगार करें
हरित चुनर ओढ़े वसुधा, अनुपम रूप निखार रही,मंद समीर संग प्रकृति अपनी छवि मनोहर सँवार रही।तरु-पल्लव जीवन के प्रहरी, सुख-शीतल…
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मोल लगा लो
ऊँचे महल की नींव भी मिट्टी होती है,शायद कल को ये मिट्टी ही आसमान छू ले।आज धूल समझकर पाँव से…
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मेरे पिता मेरा स्वाभिमान।।
जिनके सहारे चलती मेरी दुनियां है,जो अंगुली पकड़ मुझे चलना सिखाते हैंजब भी मुझसे कोई गलती होती हैं,वो मुझे डांट…
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एक पूर्ण अस्तित्व हो पापा
कैसे कर लेते हो तुम ये सब,अपूर्ण को भी पूर्ण कर देते हो।एक पूर्ण अस्तित्व हो पापा,घर की हर नींव…
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पीर सुनेगा कौन?
निर्दोषों का बस यहां,रोज हो रहा खून।अंधा बहरा हो गया,लगता अब कानून।। दोषी निधड़क घूमते, पुलिस प्रशासन मौन।पीड़ित मानव की…
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पापा : स्मृतियों में अमर, हृदय में सदैव जीवित
25 फरवरी 2024, रविवार कृष्ण पक्ष का वह काला दिन,जब आप हमें छोड़कर अनंत यात्रा पर बिना कुछ कहे निकल…
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