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  • समाधि पद

    सूत्र— ४वृत्तिसारूप्यमितरत्र ।इतरत्र= दूसरे समय में {द्रष्टा का} वृत्ति सारूप्यम्= वृत्ति के सदृश स्वरूप होता है । अनुवाद— दूसरे समय…

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  • हर पल बहता रहता जीवन

    ।।हर पल बहता रहता जीवन ।।शीतल मलयज सुरभित दिगंत,पवन संग उड़ता घन अनंत।गिरती बूंदें जा वन-उपवन,मंद स्वर में करती है…

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  • कोई और है

    उथल पुथल इतनी हो रही हैंकैसा चल रहा दौर है।मैं हूँ सामने बैठा मगरदिख रहा कोई और है।।महंगाई की इस…

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  • कविता- माता-पिता और गुरू

    माता ते जग है टिका, माता सम नहिं आन।दूजा गुरु सम नहिं कोई, जगत मातु-गुरु जान।। माता, गुरु, पितु तीन…

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  • आरजु प्यार की

    संग संग हम जी लें मर लें ,संग संग में कुछ तो कर लें ,अंतर्मन हम प्यार ये भर लें…

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  • मेरा परिचय

    उत्तराखण्ड वासी हूँ, मैं योगेश गहतोड़ी,जीवनसंगिनी शान्ती से सजी मेरी जोड़ी।देवभूमि से नब्बे के दशक में जब चला,दिल्ली में परिवार…

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  • साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज के तत्वावधान में मासिक बैठक एवं गोष्ठी संपन्न

    प्रयागराज। साहित्यांजलि प्रकाशन की मासिक पत्रिका “साहित्यांजलि-प्रभा” के उपसंपादक वरिष्ठ साहित्यकार डा•योगेन्द्र कुमार मिश्र विश्वबन्धु के नीमसंराय काॅलोनी स्थित आवास…

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  • मैं और तू

    मैं, “मैं” को छोड़कर आगे निकल गया हूँ,क्योंकि असहज थी वो—मेरे साथ चलने में। अब मेरा लौट आना शायद सम्भव…

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  • सेवा और त्याग की सार्थकता

    “सच्ची और सम्मान के लिए पैसे की नहींबल्कि सेवा और त्याग की जरूरत होती है”सेवा और त्याग, मनुष्य जीवन का…

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  • मानवधन

    दिवा है शनिदेव की ,महिमा बड़ी अपार ।दे दे लेखनी में शक्ति ,विघ्न हरो बेशुमार ।।एक कल आनेवाला ,दूजा कल…

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