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  • जगत् सुधार से पहले, मन आंगन बुहार

    जगत् सुधार से पहले, मन आंगन बुहार।अपने अंतर्मन में हर पल लगाया कर गुहार।। अन्य को सुधारने से पहले खुद…

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  • अटल-सत्य

    आत्मा अंततः कर्म भोगकर्मरत मृत्यु लोकसत्य कर्मसुस्पष्ट करें…. जावे जीव परलोक।सत्य ज्ञान बलआत्मा इच्छा रहित हो…. त्यागे इहलोक।परमसत्ता में विलीन…

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  • भगवान

    (१) भ — भक्ति और भाव का स्वरूप “भ” से भक्ति जन्म लेती, मन हो जाता शांत,ईश्वर स्मरण करे जो,…

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  • यू जी सी

    शीर्षक : क्या हम आजाद हैं ?विधा : आलेखराजनीत शब्द भी अजीब शब्द है । राजनीत में आजीवन ही गद्दी…

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  • सबके होते हुए भी अकेला

    दुनिया लगती एक मेला हैअपनों की भीड़ में धकेला हैखालीपन दिल के किसी कोने मेंकभी कभी तन्हा रातों में अकेले…

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  • ये सफ़र

    है ये जिंदगी— ‘खुद के साथ खुद का एक अज्ञात सफ़र।’ है फलसफा– सफ़र आसां होगा नहीं मन में स्वार्थ…

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  • बसंत का संगीत

    झरे पुराने पात , नव कलियां फूटी हैं….हुई लताएं कुसुमित, आम्र मंजरियां झूली हैं ।करती कोयल मधुर गान, प्यारे गीत…

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  • गंगांजलि साझा काव्य संग्रह संदीप सक्सेना जबलपुर को भेंट किया – कवि संगम त्रिपाठी

    गंगांजलि साझा काव्य संग्रह संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार संदीप सक्सेना जी को कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया।…

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  • गुण अवगुण

    ईश्वर ने सृष्टि का निर्माण किया और उसे स्वतंत्र छोड़ दिया। संपूर्ण सृष्टि पर ईश्वरीय तीन नियम परिवर्तन, संतुलन और…

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  • उसके भीतर

    वह सामने बैठा था, और मैं उसे देखती रही,पर सच ये है—उस पल मैं ख़ुद को खोजती रही। उसकी बातें…

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