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  • समाजरक्षण

    (स्वरचित आलेख) प्रस्तावनासमाज एक जीवंत, गतिशील और परस्पर जुड़ी हुई संरचना है, जिसका वास्तविक स्वरूप केवल इमारतों, सड़कों या संस्थानों…

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  • शिवजी

    मंगलमय वनचारी शिवजी,महादेव संसारी शिवजी।(स्वरचित रचना) मंगलमय वनचारी शिवजी,बैरागी, त्रिपुंडधारी शिवजी। महादेव संसारी शिवजी,सती-पार्वती के प्यारे शिवजी। गले में सर्पों…

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  • ईर्ष्या , द्वेष , डाह जलन

    दिनांक : 22 जुलाई , 2025दिवा : मंगलवारईर्ष्या द्वेष डाह जलन है पीड़ा ,सीधे तन को बनाता है अपंग ।निज…

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  • कहानी: कुलरक्षण

    “कुलरक्षण” का अर्थ सिर्फ अपने वंश या परिवार की रक्षा करना नहीं है, बल्कि उन अच्छे विचारों, संस्कारों और सिद्धांतों…

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  • लेख

                       इस दृश्यमान जगत में प्रत्येक दृश्य और अदृश्य वस्तु, स्थिति और परिस्थिति तटस्थ है। पदार्थ परस्पर संयुक्त होते हुए…

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  • प्रारब्ध और पुरुषार्थ का रहस्य

    कितने ही मनुष्य प्रारब्ध यानि भाग्य को प्रधान बताते हैं और कितने ही पुरुषार्थ को। वास्तव में अपने-अपने स्थान में…

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  • बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख

    (भाव पल्लवन) जीवन एक रहस्यमयी यात्रा है, जिसमें अनेक अनुभव, संघर्ष और सुख-दुख छिपे होते हैं। कभी – कभी हमें…

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  • एक परिस्थिति

    स्वर्ण हिरण, सीता अपहरण, जटायु मिलन, सुग्रीव मिलन, बाली युद्ध, राक्षसों का ऋषियों की तपस्या में विघ्न, शबरी मिलन।मौलिक लेखन,,संदीप…

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  • “मनुष्य और भगवान का संबंध”

    (वेदों और उपनिषदों की दृष्टि में) यह अत्यंत गूढ़, जिज्ञासापूर्ण और धर्म-दर्शन के मूल में स्थित प्रश्न है। इसका उत्तर…

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  • सुरक्षा

    सनातन के दृष्टांत कामना चतुष्टय में चतुर्थ विषयों में सुरक्षा पहले है। किसी भी जीव को यह शशक्त, उत्साही, निडर…

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