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कविता
आजकल रिटायरमेंट ले रहे दोस्तों को बधाईयां देने का दौर चल रहा है शुभकामनाएं देते हुएदोस्तों का ग्रुपमसखरी भी करता…
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साथिया तेरे बिन
साथिया तेरे बिन जी ना पायेंगे,कसम से कहता हूँ, अब ना जियेगेजब तुम ही नही,मेरे जिंदगी मे,तोअब इस दुनियां मे,जी…
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गोस्वामी तुलसीदास और तुलसी वांगमय
संभु प्रसाद सुमति हिय हुलसी।राम चरित मानस कवि तुलसी।यह पंक्तियाँ, कुछ सूत्रों के अनुसार, भगवान शंकर की कृपा से तुलसीदास…
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गजल
काफिया —- ओ की बंदिशरदीफ—- अब तो।बहर— 1222-1222-1222-1222=28 वतन की शान में मिलकर कदम बढ़ते चलो अब तो,तिरंगे का सदा…
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जीवन पथ पे बढ़ते रहो
निज जीवन तुम पढ़ते रहो ,जीवन पथ तुम बढ़ते रहो ।कठिन वक्त से संघर्ष करके ,नव पथ जीवन गढ़ते रहो…
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बिखरे हुए ख़्वाब
लकीरों में बँटी हुई ज़िंदगी,कोनों में बिखरे हुए ख़्वाब।हर आकार कुछ कहता है,हर साया खोलता है एक नया हिसाब। बीचों-बीच…
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प्रेमचंद: कलम के योद्धा
न सिंहासन, न राज मुकुट न वैभव की चाह, हाथों में बस एक कलम थी, जिसने हर मन इतिहास लिखा…
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मुंशी प्रेमचंद
लमही के पावन आँगन से, जो बना लेखनी का अवतार,‘गोदान’ और ‘ग़बन’ की गाथा, से महकाया साहित्य-संसार।। शोषित-पीड़ित के सजल…
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद: कलम के किसान: हिंदी साहित्य के सूर्य
जन्म और प्रारंभिक जीवनहिंदी साहित्य के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही नामक…
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कलम का किसान: मुंशी प्रेमचंद को समर्पण
31 जुलाई अठारह सौ अस्सी,लमही गाँव में जन्मी एक ज्योती।धनपतराय नाम, दुनिया ने कहा,प्रेमचंद हिंदी का सच्चा मोती॥ पिता मुंशी…
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