
भले पैर थक गए दौड़कर,बदन दर्द से चूर बहुत है।
बिना रुके बस चलते रहना, लक्ष्य अभी भी दूर बहुत है।।
कठिन डगर है लक्ष्य प्राप्ति की,पथ में आएंगी बाधाएं।
नहीं मानना हार कभी भी, हृदय नहीं लाना शंकाएं।
मन में लाना नहीं निराशा,आशा सदा बनाए रखना।
नहीं सफलता जब तक मिलती,पथ में आगे बढ़ते रहना।
हट्टे- कट्टे जवां मर्द हो,आँखों में भी नूर बहुत है।
बिना रुके बस चलते रहना, लक्ष्य अभी भी दूर बहुत है।।
अभी जमीं नापी है तुमने,अभी तुम्हें है गगन नापना।
गिरो उठो फिर जमकर दौड़ो, नहीं कभी भी हार मानना।
जो भी आए पथ में रोड़ा,मार हथौड़ा तोड़ डालना।
हरदम आशावादी रहना, नहीं निराशा हृदय पालना।
भारत के तुम वीर युवा हो,तुम पर हमें गुरूर बहुत है।
बिना रुके बस चलते रहना, लक्ष्य अभी भी दूर बहुत है।।
अपनी मेधा श्रम के दम पर, दुनिया भर में नाम कमाओ।
ऊंची पदवी हासिल करके, अपने कुल का मान बढ़ाओ।
परिश्रम का फल होता मीठा, सारी दुनिया को बतलाओ।
नहीं लोग जो कर पाए हैं,वो सब तुम करके दिखलाओ।
अभी समय है कुछ बनने का, फिर जीवन नासूर बहुत है।
बिना रुके बस चलते रहना, लक्ष्य अभी भी दूर बहुत है।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













