
( मीरा की विरह – भावना पर आधारित)
घुंघरू बांधे पांव में मीरा नाचे आज,
मन में बस गिरधारी बसे तन पर साधु – साज।
राजमहल सब छूट गए छोड़ा जग का त्रास,
मन में बसती रह गई पिया मिलन की आस।
नयन बिछाए राह में कब आएंगे श्याम,
हर धड़कन में केवल तेरा ही नाम।
मंदिर – मंदिर ढूंढती लेकर प्रेम की प्यास,
दिन – रैन बढ़ती ही रही पिया मिलन की आस।
विष का प्याला भी मिला फिर भी न डोली प्रीत,
काँटों में भी ढूंढती वह मोहन की संगीत।
दुनियां चाहे कुछ कहे अटल रहा विश्वास,
सांस – सांस में बस गई पिया मिलन की आस।
एक दिन ऐसी घड़ी आई खुल गए सब द्वार,
मीरा खोई श्याम में मिट गया संसार।
भक्त और भगवान का हुआ मधुर एहसास,
पूर्ण हुई तब प्रेम की पिया मिलन की आस।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़













