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कविता

अपने हि दांतों ने, अपनी हि जिभ काट ली,,

चटकारे ले ले कर चूसने लगे जब हम उंगलीयां तो अचानक मेरी जिभ कट गई,,

मुफ्त कि मलाई में,,,,

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना है,,

लोग भीड़ में से खेंच के ख़िलाफत काम बता रहे थे,,,
,, दो दिन से कुछ न खाया उसने,,,,
घिस रहा था बेचारा

मुफ्त कि भलाई में,,,

जिस प्रेम रस को पीने से मर जाएं,,,
तो क्यों पिएं
मिठे ज़हर
को,,,,
इससे तो अच्छा है कि जान बचा कर भाग जाएं,,,

मंगेतर को धक्का दिया और थोड़ा सा रहम नहीं किया,,, जान से हि मार डाला,,,,

और प्रेम जाल में फंसाया आशिक को भी जिते जी फंसा डाला,,,,

ऐसी ऐसी लड़कियां भी है थौड़ा सम्भल कर रहना,,,,दिवानो
जो रस गले से उतर गया था उसी रूप रस ने गला खराब कर डाला,,,,

किसी पर भरोसा नहीं कर सकते विश्वास करने लायक कोई नहीं नज़र आता,,,
क्या सितम कर डाला,,
कैसा गुनाह कर डाला,,

अशोक सुमन

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