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पर्यावरण रक्षा

काव्य

पौधा एक लगाएंआज कल की सांस बचाएंगे

सुनी धरती मुस्कायेगी ,हरियाली से सजाएंगे ।

हरे भरे बाग बगीचे ,फिर से लहलहाएंगे ।

धरती नाच उठेगी फिर से ,कल की सांस बचाएंगे।

धूप रही है माथे पर ,सूख रही है यह धरा।

पेड़ों की छाया लौटी तो महक उठेगी यह धरा।

नदिया फिर से गाएंगी, पंछी गीत सुनाएंगे ।

पौधा एक लगाएं आज कल की सांस बचाएंगे ।

बच्चों के सपनों के खातिर, धरती मां का मान रखो ,

आज जो बीज हम बोएंगे ,कल का उसको दान रखो।

हर आंगन में हरियाली हर मन में आशा लाएंगे ।

पौधा एक लगाएं आज, कल की सांस बचाएंगे।

ना यह बोझ ,ना यह कर्ज ,यह जीवन का वरदान है ।

पेड़ लगाकर लिख डालो ,एक पेड़ मां के नाम है ।

लगाकर जग में एक, नया विधान बनाएंगे ।

हर आंगन में हम सभी, एक पेड़ लगाएंगे

प्रतिभा दिनेश कर
सरायपाली विकासखण्ड
महासमुन्द

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