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धरती का शृंगार करेविधा-कविता


विषय- वृक्षारोपण

शीर्षक : वृक्षारोपण – धरती का शृंगार

वृक्षारोपण पुण्य कर्म है,
धरती का शृंगार करे।
सूनी बंजर धरा को
हरियाली का उपहार करे॥

पीपल, नीम, बरगद लगाकर,
जीवन में उल्लास भरें।
शीतल छाया देकर सबको,
दुःख के ताप को दूर करें॥

पक्षी गाएँ मधुर तराने,
डाल-डाल पर नीड़ बने।
फूलों की मुस्काती खुशबू,
उपवन को नव प्रीत तने॥

वर्षा के शुभ मेघ बुलाएँ,
खेतों में खुशहाली लाएँ।
शुद्ध वायु का दान कराकर,
जन-जन का कल्याण कराएँ॥

धरती माँ का मान बढ़ाएँ,
हर आँगन हरियाली हो।
नदियाँ निर्मल, वन समृद्ध हों,
जीवन में खुशहाली हो॥

आओ मिलकर प्रण यह लें,
वृक्षों का सम्मान करें।
एक-एक पौधा रोपित कर,
प्रकृति का गुणगान करें॥

वृक्ष बचेंगे तभी सुरक्षित,
अपना यह संसार रहे।
वृक्षारोपण से ही जग में,
धरती का शृंगार रहे॥


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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