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गजल सृजन

काफिया –आन
रदीफ –दो सारथी।
बहर -212–212–212–212=20

प्रेम को दिल लगा ध्यान दो सारथी,
दूर हों नफरतें ज्ञान दो सारथी।

कठिन राहें मिले हिम्मत न छोड़ना,
सफलता पा सके आन दो सारथी।

ज़िंदगी की डगर में अँधेरा घना,
दीप बनकर नई शान दो सारथी।

सत्य के पथ चलूँ, धर्म का मान हो,
हौसलों को नई जान दो सारथी।

“सुरभि” श्रीकृष्ण से कर रही प्रार्थना,
भक्ति का अमृतमय पान दो सारथी।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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