
अब मिथ्या व्यवहार का हो चला है बोलबालामिथ्याचार जिस ने न सीखाधक्के खाए नित्य… जग में रह जाए अकेला।सत्य व्यवहार की जरूरतअब कहां बची हैझूठी प्रशंसा करो …झुक कर करो जनाब कीवे फूले न समायेइसी चाहत के थे वो भूखेतमन्ना जो पूरी हुई… देखे ख्वाब की।
वो जनाब भी सभी क समक्ष कहें…
भगत हैं ये मेरे … ऐसे सज्जन नहीं बचे अब बहुतेरे
काम इनका न लटकने पाये
ऐसा सज्जन… पूरे हज्जूम संग
कहां मिलता है …जो चाये पे बुलाए।
इन का रुतबा कायम रहे
जो काम ये कहें… उसे तत्काल हम क्यूं न करें।
ऐसे लोग
जो महानुभाव का गुणगान न करे
सत्य कथन का नहीं है जमाना
सत्य के मीत मिलें न ढूंढे
सारा जहां चाहे हम घूमे ।
सत्य छुप गया है —
राख के ढेर
दबी हुई है उसमें वो चिंगारी
हवा जो चली ….वो न बन जाए आंधी
चहुं दिस लगेगी आग … न जाने
किस-किस की हो बर्बादी।
इस जग में
अब राख के ढेर में बचा है– सत्य
एक दिन हटे गी राख
सत्य अपना रूप दिखाये गा
जब होगी दिन में ही रात
आसमान में फिर दिखाई देगी… तारों की बारात
जग नियंता … होगा साथ
ये प्राचीन सनातन शास्त्रोक्त है कथन–
बिछ गई जो… है कलिकाल की बिसात ।
- महेश शर्मा, करनाल
अब मिथ्या व्यवहार का हो चला है बोलबाला
मिथ्याचार जिस ने न सीखा
धक्के खाए नित्य… जग में रह जाए अकेला।
सत्य व्यवहार की जरूरत
अब कहां बची है
झूठी प्रशंसा करो …झुक कर करो जनाब की
वे फूले न समाये
इसी चाहत के थे वो भूखे
तमन्ना जो पूरी हुई… देखे ख्वाब की।
वो जनाब भी सभी क समक्ष कहें…
भगत हैं ये मेरे … ऐसे सज्जन नहीं बचे अब बहुतेरे
काम इनका न लटकने पाये
ऐसा सज्जन… पूरे हज्जूम संग
कहां मिलता है …जो चाये पे बुलाए।
इन का रुतबा कायम रहे
जो काम ये कहें… उसे तत्काल हम क्यूं न करें।
ऐसे लोग
जो महानुभाव का गुणगान न करे
सत्य कथन का नहीं है जमाना
सत्य के मीत मिलें न ढूंढे
सारा जहां चाहे हम घूमे ।
सत्य छुप गया है —
राख के ढेर
दबी हुई है उसमें वो चिंगारी
हवा जो चली ….वो न बन जाए आंधी
चहुं दिस लगेगी आग … न जाने
किस-किस की हो बर्बादी।
इस जग में
अब राख के ढेर में बचा है– सत्य
एक दिन हटे गी राख
सत्य अपना रूप दिखाये गा
जब होगी दिन में ही रात
आसमान में फिर दिखाई देगी… तारों की बारात
जग नियंता … होगा साथ
ये प्राचीन सनातन शास्त्रोक्त है कथन–
बिछ गई जो… है कलिकाल की बिसात ।
महेश शर्मा, करनाल













