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ठहर ले चलों

एक पल बस ठहर ले चलो फिर चले,
ख्वाब आँखों में भर ले चलो फिर चले।
प्यार की आरती द्वार पर हो रही,
आँचमन साथ कर ले, चलो फिर चले।

उम्र भर दौड़ते-दौड़ते थक गए,
साँस को चैन दे ले चलो फिर चले।
ज़िंदगी रोज़ मसरूफ़ करती रही,
आज दिल की सुन ले चलो फिर चले।

शहर की भीड़ में हम भी खोने लगे,
ख़ुद से मिलने की फुर्सत निकालें चलो फिर चले।
तेरे कंधे पे सर रख के रो लूँ ज़रा,
दर्द का बोझ हल्का कर ले चलो फिर चले।

वक़्त के हाथ में रेत-सी उम्र है,
मुट्ठी खोली तो सब बह जाएगा।
इससे पहले कि हाथ खाली हो जाएँ,
इश्क़ का नाम लिख ले चलो फिर चले।

नाम उसका लबों पर लाऊँ तो,
होंठ खुद-ब-खुद आँचमन कर लेते हैं।
एक पल बस ठहर जा मेरी जान,
तेरे दीदार से मेरी रूह वुज़ू कर लेती है, चलो फिर चले।

जब थक जाएँ पाँव, और हिम्मत भी हारे,
अमन” तब तेरा नाम ले ले चलो फिर चले।
तू ठहर जाएगी एक पल को अगर,
तो ये टूटा मुसाफिर सँवर ले चलो फिर चले।

सर्वाधिकार सुरक्षित मौलिक अधिकार एवं अप्रकाशित रचना।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)

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