
आम ले लो आम
सस्ते लगे हैं दाम ,
आम देखो ताजा ,
खाने में है माजा ।
सुंदर स्वादिष्ट लो ,
मन भरकर खाओ ,
रोते होंगे बच्चे तेरे ,
ले उसे खिलाओ ।
मौसमी फल राजा ,
ऐसा कहाॅं है गाजा ,
आम है ताजा ताजा ,
आम बजा दे बाजा ।
आम जो खा न पाए ,
ऋतु बीतते पछताए ,
पीछे पछताए हो क्या ,
जब चिड़ी चुग जाए ।
ऋतु जब ये बीत जाए ,
आम कहाॅं मिल पाए ,
पैसे रहेंगे धरे के धरे ,
आगे न कोई उपाय ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार













