
अनुराधा नक्षत्र की छाया में,
बकुल वृक्ष मुस्काता है।
मौलसिरी के नाम से विख्यात,
मधु-गंधा भी कहलाता है॥
ऋग्वेद बोले औषधि सूक्त में,
“ओषधयः सम् वदन्ते सोमेन”।
हर पत्ता, हर फूल इसका,
देव तुल्य है, अमृत-सा चंदन॥
श्वेत-श्वेत छोटे फूल इसके,
रात भर सुगंध बिखेरते है।
जैसे अनुराधा की मैत्री हो,
मन के तार से तार जोड़ते है॥
बरगद-सी छाया,पीपल-सा मान,
बकुल धरा का श्रृंगार बना।
जिसकी छाँव तले बैठकर,
ऋषि का ध्यान साकार बना॥
कहते हैं बकुल लगाने से,
घर में लक्ष्मी जी वास करे।
बेटी की डोली सजती इससे,
माला गूंथकर मनको हर्षे॥
आओ प्रण लें हम सब मिलकर,
बकुल का पौधा लगाएँगे।
अनुराधा की मैत्री-भावना को,
धरा पर साकार बनाएँगे॥
क्योंकि वेदों पहले से वर्णित,
वनस्पति ही जीवन आधार है।
बकुल बचाओ,पूजो अनुराधा,
यही प्रकृति से सच्चा प्यार है॥
नेहा कुमारी
शोधार्थी
जम्मू विश्वविद्यालय जम्मू













