
बाबा ऐसा वर ढूँढो मेरे लिए,
जो माँ सा ममता दे, पिता सा साया दे।
रूठ जाऊँ तो बच्चे सा मनाना जाने,
और दुनिया के सामने मेरा सर उठाना जाने।
बाबा ऐसा वर ढूँढो मेरे लिए,
जिसकी आँखों में मेरे सपनों की उड़ान हो।
जो मेरी ख़ामोशी की भी ज़ुबान हो,
मेरी कमज़ोरी ना, मेरी ताक़त की पहचान हो।
दौलत के अंबार ना ढूँढना बाबा,
बड़ी कोठी, गाड़ी का ना ख़्वाब देना।
बस इतना हो कि दो वक़्त की रोटी इज़्ज़त से खाएँ,
और सुख-दुख में एक दूजे का हाथ थामे जाएँ।
बाबा ऐसा वर ढूँढो मेरे लिए,
जो ससुराल को घर बना दे।
जो मेरे मायके को भी अपना कहे,
मेरे माँ-बाबा के पैर छूकर आशीष ले।
शराब-जुए की लत से दूर हो बाबा,
बात-बात पर हाथ उठाने का ग़ुरूर ना हो।
मेरी हँसी पर अपनी दुनिया लुटा दे,
और मेरे आँसू अपनी आँखों में समेट ले।
बाबा ऐसा वर ढूँढो मेरे लिए,
जो रिश्तों को निभाना जानता हो।
मुझे देवी ना समझे, इंसान समझे,
ग़लती पर डाँटे, मगर मान भी ले।
अमन कहता है हर बेटी की यही पुकार,
राजा नहीं, बस एक सच्चा हमसफ़र हो।
बाबा ऐसा वर ढूँढो मेरे लिए,
जिसके साथ बुढ़ापा भी सुहाना सफर।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)













