
खुशामदी खरबुजों की नई प्रजाति उपलब्ध है साहब ले जाइये वाहवाही रेट मे !
सिधे बेझिझक चले आईये ताला नही लगाया हमने अपने शंखवादी आफिस के गेट मे !
चुनावी बरसाती मोसम मे ये खुशामदी खरबुजों की फसल का उत्पादन गजब का रिकार्ड तोड रहा है !
आप आईये हमारा चापलुसी चपरासी बीज लेकर हर सियासी शहंशाह के पिछे दोड रहा है !
झूँठे वादों का उत्पादन भी हरबार से ज्यादा हो रहा है !
नेताजी के जयकारे लगाने वाले मजदुर केवल ऐक बोतल ओर समोसों पर उपलब्ध है !
जय हो सुविधापरस्त देवताओं की ईनकी सुविधाऐं रहे सुरक्षित हमारी मख्खनवादी संस्था का बस यही मकसद है !
प्रजातंत्र केवल विग्यापन है वर्ना पुँजीवाद वर्तमान मे हावी है चुनाव लडने मे होता अरबों खरबों का खर्चा !
सच तो सच है साहब जिनके कब्जे मे लक्ष्मी उन्ही की चुनावी जितकी हो रही चर्चा !
केवल मत हैं आप जिवनभर भोगें यह अभिषाप भुलकर भी मत लडना चुनाव रामुकाका वर्ना कचोरी का प्रबंधन होके रह जायेगा आपका पर्चा !













