
वीर शिरोमणि राणा प्रताप को ,
सत सत नमन हमारा!
स्वाभिमान और आजादी का था ,
अनुपम लक्ष्य तुम्हरा!!
तुम जैसे वीरों का, इतिहास
ऋणी होता है!
आनेवाली पीढ़ी को भी ,
गौरव होता है!!
राष्ट्र भक्ति होता है क्या? ये,
हमने तुमसे सीखा!
देश की खातिर हंसते हंसते,
जीना मरना सीखा!!
देशद्रोहियों को सबक सिखाना,
है तुमसे ही सीखा!
आजादी के लिए विषम परिस्थिति,
में भी लड़ना सीखा!!
आया समय पुनः वैसा ही,
गद्दारों ने फूंफकारा !
फिर आया है काम हमें,
दिया गुरु मंत्र तुम्हरा!!
‘जिज्ञासु’ जन हैं सचेत अब,
नहीं करेंगे नादानी!
सबक सिखादेंगे उन सबको ,
जिसने भी भौहें तानी!!
कमलेश विष्णु सिंह “जिज्ञासु’













