
पिता बेहद प्यार करता है
अपने बच्चों को बताता नहीं है
दिन-रात करता है मेहनत बच्चों की खातिर
पर कभी किसी से जताता नहीं है
जिम्मेदारियां का कंधों पर बोझ लिए हैं
पर कभी परिवार को बताता नहीं है
पिता बच्चन के लिए अनमोल रत्न हैं
पर अपना अहमियत दिखाते नहीं हैं
पिता सिर्फ एक शब्द नहीं एहसास है
एहसास को कैसे लिखूं सूझता नहीं है
पिता बच्चों के लिए आसमां है
यह बात दिल से हटता नहीं है
पिता बच्चों के लिए सौगात होते हैं
पर ये ईश्वर के कोई खैरात नहीं है
पिता एक ओर परिवार रूपी गाड़ी के
सारथी हैं
इन्हें कम मत आंकना ये एक महारथी हैं
पिता संघर्ष की आंधियों में मंजिल की दीवार हैं
परेशानियों से जूझने को दो धारी तलवार हैं
डॉ मीना कुमारी परिहार













