
छुट्टियों का सदुपयोग करें
ननिहाल का रुख करें
कूलर की ठंडी हवा का भरी दोपहरी आनन्द लेँ
इस कूलर मे सारा दिन कन्ना दूड़ी सांप सीढ़ी खेले
राम रहीम राजन इकबाल चाचा चौधरी की कॉमिक पढ़ें
शाम को मोहल्ले की गलियों मे दोस्तों संग गप्प लडावें
फिर रात मे देर तलक बच्चे सारे छुपनी छूपाई खेले
कॉलोनी की गलियों मे देर रात तक पुरुष महिलाओं बुजुर्गों के लगते थे मेले
क्या दिन थे वो जो हमारा दौर कहलाता था
टीवी मोबाइल से दूर एक अलग ही दुनिया घुमाता था
टीवी पर वी सी आर से रात भर मूवी का मज़ा आता था
खेलने खाने मे ही दिन रात निकल जाता था
कच्चे आम जी भर खाते थे
बर्फ मे रंग मिलाके एक सांस मे गटक जाते थे
इसी तरह हम छुट्टियां मनाते थे
कसम से वो दिन भी छुट्टियों के क्या खूब बीत जाते थे
बस इसी तरह हम छुट्टियों का सदुपयोग कर जाते थे
ओर भी हसीन छुट्टियों की वो यादें थी एक दूजे को जताते थे
याद करों अश्क बह जाते है
छुट्टियों के वो दिन कसम से बहुत याद आते है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













