Uncategorized
Trending

एक सपना जो कभी हक़ीक़त होगा

सपने मे मैंने मृत्यु को करीब से देखा,
कफ़न ओढ़ा अपना तन जलते देखा,
खड़े थे लोग हाथ बांधे एक पंक्ति जैसे,
कुछ उदास और कुछ दिखे परेशान से।

पर कुछ तो छुपा रहे अपनी मुस्कान थे,
दूर खड़ा देख रहा मैं ये सारा मंजर था,
तभी किसी ने हाथ में मेरा हाथ थामा,
देखा चेहरा उसका, मैं बड़ा हैरान था।

हाथ थामने वाला मेरा भगवान था,
चेहरे पर मुस्कान और पदनग्न था,
देखा मैंने उनकी ओर जिज्ञासा से,
और पूछना चाहा बहुत कुछ उनसे।

तो हँस कर बोले वे कि तूने हर दिन,
दो घड़ी ही सही, जपा मेरा नाम था,
आज उसी क़र्ज़ को चुकाने आया हूँ,
तुझे अपनी चरण शरण देने आया हूँ।

रो दिया मैंने अपनी बेवक़ूफ़ियों पर,
तब यह सोच कर कि दो घड़ी जपा
जिसको, अंत में शरण देने आये हैं,
जिनमें हरपल रमा, श्मशान लाये हैं।

तभी खुली आँख मेरी, मैं सशरीर
और सही सलामत विद्यमान था,
कितना नादान था मैं आज तलक,
हकीकत से कितना अनजान था।

आदित्य मान उनका किया जाता है,
जो हमारे प्रेम भाव को समझते हैं,
ज्योति जलाओ, जहाँ जरूरत हो,
दीपक दिन में मायने नहीं रखते हैं।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *