Uncategorized
Trending

जीवन कोई उत्सव भी है,

जीवन कोई उत्सव भी है,
जीवन एक परीक्षा भी है,
कभी हँसी के फूल खिलाता,
कभी अश्रु की भाषा भी है।

कभी सुबह की स्वर्णिम किरणें,
मन में नव विश्वास जगाती हैं,
कभी साँझ के गहरे साए,
अनगिनत प्रश्न उठाती हैं।

रिश्तों की डोर थामे-थामे,
कितने मौसम बीत जाते हैं,
कुछ अपने साथ निभाते हैं,
कुछ यादों में सिमट जाते हैं।

ठोकर खाकर जो सँभल जाए,
वही जीवन का सार समझे,
हार के भीतर छिपी हुई
जीत का सच्चा द्वार समझे।

जीवन नदी है बहते रहना,
रुक जाना इसका धर्म नहीं,
अंधियारे कितने भी गहरे हों,
उम्मीद का दीपक कम नहीं।

हर पल को प्रेम से जी लेना,
हर दुख को अनुभव मान लेना,
जीवन ईश्वर की अनुपम रचना है,
इसे हँसकर सम्मान दे देना।॥

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *