
कुछ ऐसे बंधन होते हैं, जो बिन बांधे बंध जाते हैं
मिलते ऐसे लोग जो अपनों से बढकर बन जाते हैं
पूर्व जन्म के कुछ अधूरे किस्सों को पूरा करना है
कुछ मिलकर बिछड जाते इतना संबंध बनाते हैं
जितना रहते जीवन में यादगार भूमिका में रहते हैं
धरती में यह जो अनमोल अद्भुत मानुष जीवन है
नहीं मिलता बार- बार मिला दीन हित उपकारी है।
-गोवर्धन थपलियाल













