
बोलती कलम मंच के संस्थापक श्री संजय राई सांई जी द्वारा एक सुन्दर कार्यक्रम आयोजित किया गया जो पिताओं को समर्पित रहा । मंच पर उपस्थित सभी रचनाकारों ने अपनी सुंदर, भावपूर्ण रचनाओं, कविताओं से एक खूबसूरत शाम पिता को समर्पित की । कार्यक्रम का शुभारंभ आदरणीया श्री आशा शर्मा जी द्वारा मां सरस्वती की वंदना से किया गया। तत्पश्चात एक के बाद एक सभी आदरणीय रचनाकारों ने अपनी अपनी सुंदर सुंदर प्रस्तुतियां दी।
जिसमें शामिल रहे ,, आदरणीया आशा शर्मा जी,आ.सत्या पांडेय जी,
आ. विनिता बरनवाल जी ,
आ.प्रभा जैन जी ,आ. सरिता श्रीवास्तव जी ,आ. नलिनी जी,
आ. मोनिका डागा जी ,
आ. शिखा पांडेय जी,
आ.चंद्रवती शुक्ला जी ,आ.धर्मी भट्ट जी ,आ. ज्योति जी ,आ.कुसुम रानी सिंघल जी,
आ. प्रिया काम्बोज जी और स्वयं मंच संचालन की कमान संभाली आदरणीय संस्थापक महोदय श्री संजय राई सांई जी ने।
पिता नाम सुनते ही सबके सामने एक कठोर व्यक्तित्व की छवी नजर आती है मगर सभी रचनाकारों ने आज उनके कोमल ,सौम्य, मार्गदर्शक और भावनात्मक रूप के भी दर्शन कराएं।
आशा शर्मा ने जी कहा ,
पिता ही हमारा संसार
परिवार की खुशियों का आधार
स्वयं की कमियों को झेलकर
पिता के सिवा कोई खुशियों को उड़ान देगा ।।
विनिता बरनवाल ने कहा , हजारों की भीड़ में खुद को अकेला पाती हूं
पापा जब आपकी याद है।।
सरिता श्रीवास्तव ने अपने पिता जी को याद करते हुए कहा, कैसे कह दूं पिता मेरे अब नहीं है,जी नहीं मानता विश्वास नहीं होता ।।
वहीं नलिनी जी ने तो पिता को खजाना बता दिया ,, खुशियों का संसार अनमोल खजाना है पिता , संस्कार और विश्वास की नींव है पिता । बच्चों की खुशियों में खुश हो जाते हैं , प्यार भरी खुशियों का पिटारा है पिता ।।
मोनिका जी ने कहा,
धीरे-धीरे अनुभव से सिखाए जीने का तरीका ,
नन्हे सपनों में रंग भरने को पिता देता हाथ में तूलिका ।
शिखा पांडेय जी कहती हैं ,पिता ज़मीन है पिता ही असली जागीर है ,जिनके पास पिता का साया वो दुनिया में अमीर है ।।
तो चंद्रवती शुक्ला जी ने बहुत ही सुन्दर गीत में कहा , मात-पिता करूं तेरा अभिनंदन,
नित चाहूं तेरा मैं दर्शन।
नहीं जहां में कोई ऐसा ,जो प्यार करे तुम जैसा ,मेरे हाथ के तुम हो चंदन,नित चाहूं तेरा मैं दर्शन।
इसके बाद प्रिया काम्बोज जी ने तो पापा को जादूगर कहा ,ये पापा भी बड़े कमाल के होते हैं, पापा नहीं वो तो जादूगर होते हैं । जब जब मांगी एक चीज दो दो लाकर देते हैं ।खुश देख मुझे खुश बड़े हो जाते हैं हर इच्छा पूरी करने को मेरी ,खुद पैर चल रिक्शे के पैसे बचाते है
हर किसी की ख्वाहिश पूरी कराते हैं ।ये पापा भी बड़े कमाल के होते हैं ।अंतिम क्षणों में श्री कुसुम रानी सिंघल जी ने अपनी खूबसूरत पंक्तियों में कहा ,,साया तुम्हारा सदा रहता
मेरे सिर पर पापा सदा हाथ रहता । बोलें बिना जो बातें तुमसे करती , उन्हीं का असर मेरे जीवन पर रहता ।।
और सबसे अंत में आदरणीय श्री संजय राई सांई जी ने अपनी पंक्तियों से कार्यक्रम का समापन किया । उन्होंने कहा,
,फूल कभी दो बार नहीं खिलतें,
जन्म कभी दो बार नहीं मिलतें ।
मिलने को तो हजारों लोग मिल जाते हैं ,पर हजारों गलतियों पर माफ़ करने वाले मां बाप दोबारा नहीं मिलतें।।
बहुत ही सुन्दर, भावनात्मक रूप से सजी एक शाम पिता के नाम ।।
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संस्थापक- श्री संजय राई सांई
मिडिया प्रभारी – प्रिया काम्बोज बोलती कलम परिवार के सौजन्य से।












