
योग से रोग को,सदा हम,
हराते रहे !
अपनी शक्ति और ऊर्जा,
बढ़ाते रहे !
था आनंदित ये जीवन,
न था कोई गम !
जबतक बंधे थे हम सभी,
योगा के संग !!
हुए दूर जबसे, हैं योगा-
से हम !
रोग ने तब से घेरा, हमें-
है सनम !!
रोग से हम सभी को है,
बचना अगर !
बस बचा योग का ही है,
अब तो डगर !!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’












