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प्रभाती वंदन एवं योग दिवस की शुभकामनाओं के साथ चंद दोहा मुक्तक

प्राण तत्व भरती प्रभा, करिए उत्तम कार्य।
उठकर प्रातः काल में,योग करो अनिवार्य।
विमल चेतना प्राप्त कर, बढ़ो कर्म की ओर ,
सत्पथ अनुगामी बनो,हृदय रखो औदार्य।।

बीता पल लौटे नहीं, जैसे बात जुबान।
समय चक्र गतिमान है, कहते संत सुजान।
हर पल का उपयोग कर, चलो वक्त के साथ,
कर्मों के अनुरूप ही,मिले तुम्हें पहचान।।

गांँठ बांँध लो आज से, करना है नित योग।
वेद शास्त्र ऋषि मुनि कहें ,इससे भागें रोग।
तन-मन होता स्वस्थ है, मेधा भी बलवान,
नव ऊर्जा संचार से,जगती के सुख भोग।।

बड़ी भाग्य से तन मिला, समझो इसका मर्म।
बाधा सारी तोड़कर, अपनाओ शुचि धर्म।
द्वेष-दम्भ को त्याग कर,परि परिजन से प्रीति,
अंत समय में साथ दे,याद रखो सत्कर्म।।

डॉ गीता पाण्डेय ‘अपराजिता’
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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