
योग महज़ जिस्म की हरकत नहीं,
रूह की राहत का पैग़ाम है।
जब फ़िक्रों का शोर बढ़ जाए,
योग सुकून का एक मुकाम है।
हर साँस में छुपी है ताज़गी,
हर पल में एक नया एहसास है,
ख़ुद से मिलने का जो रास्ता दे,
योग वही ख़ूबसूरत अंदाज़ है।
न दौलत, न शोहरत की चाह,
बस दिल में इत्मीनान रहे,
योग की रौशनी से हर इंसाँ का
तन भी महके, मन भी आबाद रहे।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मुबारक।
श्री ठाकुर देवघर झारखण्ड













