
जिनके सहारे चलती मेरी दुनियां है,
जो अंगुली पकड़ मुझे चलना सिखाते हैं
जब भी मुझसे कोई गलती होती हैं,
वो मुझे डांट फटकार वहीं लगा देते है।।
क्या करना है और कैसे करना है,
सबकुछ मुझको वही बतलाते है।
ग़र भूल गया हूँ यह कैसे करना है,
वो मुझे पास बिठाकर समझाते है।।
चाहे सर्दी गर्मी या बरसात हो,
प्रत्येक दिन काम पर जाते है।
भूख प्यास को नित सहकर भी,
वो हमारा पालन पोषण करते है।।
मेरे पिता मेरा स्वाभिमान है,
मुझे उन पर सदा अभिमान है।
हमे संस्कारो की बात बताते है
हमारे पिता अनुशासन सिखाते है।।
जब कभी मै गुमसुम सा रहता,
वो कहते तुमको किस बात की चिंता है,
बस तुम पढाई करो,आजाद रहो,
यहाँ टाइगर अभी यह जिंदा है।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान













